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अक्तूबर 13, 2010

मृत्यु


साँस का रुक जाना भी उसके सिवा क्या है, कि प्राण-वायु को अशांत ज्वार-भाटों से मुक्ति मिल जाए , कि वह ऊपर उठे विस्तार पाए और निर्बाध होकर परमात्मा से जा मिले |
                                      - खलील जिब्रान 

7 टिप्‍पणियां:

  1. sab kuch kah diya in do lines me.....the real meaning of life...great

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  2. atma aur parmatma ka milan hi to vastav me moksha hai ..........satyakathan

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  3. यही सच्च है देह तो नश्वर है ....!!

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  4. यही प्राणवायु जब ध्यान के द्वारा शांत की जाती है तो जीते जी परमात्मा का अनुभव हो सकता है !

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  5. इमरान साहब,सबसे पहले मेरा बधाई लें...आपके पोस्ट पर राजवंत दीदी के ब्लॉग से आना हुआ...अभी आपके सभी ब्लॉग को देख रहा हूँ ..और मुझे ख़ुशी हो रही है की सभी ब्लॉग अपने आप में उम्दा और भावनाओं के उछाल के साथ लिखी हुई है...ज़ज्बात,खलील जिब्रान ,मिर्जा ग़ालिब सभी ब्लॉग बेहद पसंद करने का माद्दा रखते हें...और मुझे आपके सभी ब्लॉग को follow करने में ख़ुशी महसूस हो रही है. ..आगे भी आपसे रूबरू होता रहूँगा .

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...