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जनवरी 17, 2014

प्रेम



जो मृत्यु छीन लेती है 
कोई प्राणी लौटा नहीं सकता,

जिसे स्वर्ग ने आशीर्वाद दिया है
कोई प्राणी दंड नहीं दे सकता,

जिसे प्रेम ने एक कर दिया है 
कोई प्राणी अलग नहीं कर सकता,

जो नियति ने निश्चित कर दिया है
कोई प्राणी बदल नहीं सकता, 

- ख़लील ज़िब्रान 


6 टिप्‍पणियां:

  1. मृत्यु, स्वर्ग, प्रेम और नियति कहने को अलग अलग हैं पर चारों एक की ओर ही संकेत करते हैं...इसीलिए खलील जिब्रान ने चारों को ही प्राणी के बस के बाहर बताया है

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  2. बेहतरीन...आपका ये प्रयास देख अच्छा लगा।।।

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  3. महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें | आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी इस विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - महादेव के अंश चंद्रशेखर आज़ाद पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

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  4. बहुत सुंदर .........साझा करने के लिए धन्यवाद......

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  5. खलील‍ जिब्रान को पढ़ना एक अनुभव से गुजरना है।

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...