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नवंबर 13, 2013

विवाह



एक दूसरे का प्याला तो भरो, लेकिन एक ही प्याले से मत पियो । साथ नाचो, गाओ पर फिर भी अपनी निकटता के बीच कहीं-कहीं अन्तराल भी छूट जाने दो| एक दूसरे से प्रेम तो करो, किन्तु प्रेम को पाँव की ज़ंजीर मत बनाओ | एक जगह पर खड़े तो रहो, किन्तु बहुत अधिक सट मत जाओ । जैसे वीणा के तार एक ही राग में कंपित होते हुए भी अलग-अलग हैं । हृदयों को अर्पित करो लेकिन एक दूसरे के सरंक्षण में मत रखो | 
                                                   
   - खलील जिब्रान

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर विचार...अति निकटता में सम्मान खो जाता है

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  2. इस उत्‍कृष्‍ट विचार को साझा करने के लिये आभार

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...