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जनवरी 09, 2011

क्रय - विक्रय


धरती अपनी उपज तुम्हारे हवाले करती है| और अगर तुम अपनी अंजलि भरना ही जान लो, तो तुम्हे कोई आभाव नहीं रहेगा| पृथ्वी के उपहारों के लेन - देन में ही तुमको भरपूर प्राप्ति हो जाएगी और तुम्हे संतोष होगा|

लेकिन अगर यह लेन - देन प्रेम, उदार और न्यायपूर्ण न होगा तो वह कुछ लोगों को लोभ की ओर ले जायेगा और कुछ लोगों को भूखा रहने की ओर|
                                                                           - खलील जिब्रान   

7 टिप्‍पणियां:

  1. आज लेन -देन में न न्याय है न प्रेम न उदारता, कुछ का लोभ कईयों को भूखा रहने पर मजबूर कर रहा है, हम जिब्रान जैसे संतों की वाणी को भुला बैठे हैं, इसका खामियाजा भुगत रहे हैं !

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  2. yahi baat to sabko samajhnaa hai.......pata nahi kab samjhenge

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  3. गणतंत्र दिवस की बधाई एवं शुभकामनायें.

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  4. nice one..
    Happy Republic Day..गणतंत्र िदवस की हार्दिक बधाई..

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  5. rightly said..........that we used to call sustainable development....thats the need of time

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...