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अगस्त 11, 2011

मुक्ति


तुम्हारे दिनों पर किसी चिंता का भार न हो और तुम्हारी रातों पर किसी आभाव या पीड़ा का | तब तुम निश्चय ही मुक्त हो जाओगे |परन्तु तुम्हारी वास्तविक मुक्ति वही कहलाएगी, जब यह बाधाएँ तुम्हारे जीवन को घेरें रहें और इसके बावजूद तुम इनसे ऊपर उठ जाओ......नग्न और निर्बाध |
                                                                   - खलील जिब्रान

9 टिप्‍पणियां:

  1. जब यह बाधाएँ तुम्हारे जीवन को घेरें रहें और इसके बावजूद तुम इनसे ऊपर उठ जाओ ...गहन सच्‍चाई है इन शब्‍दों में ..आभार ।

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  2. दुखों के बावजूद जो मुस्कान न मिटे, सच्ची है और मुक्ति भी व्ही सच्ची है जो चिता और अभाव के बावजूद हमे बंधन का अहसास न कराए ... बहुत सुंदर और अनुकरणीय विचार! बधाई!

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  3. खलील जिब्रान साहब के सभी विचार अनुकरणीय है हौसला बढ़ाने वाले हैं नमन उया दार्शनिक को और शुक्रिया कि आप ये विचार बाँट रहें हैं

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  4. कल-शनिवार 20 अगस्त 2011 को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा नयी-पुरानी हलचल पर है |कृपया अवश्य पधारें.आभार.
    Imran ji aap prashansaniya karya kar rahe hain.badhai aapko.

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  5. गहन भावों का समावेश ।

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  6. प्रेरणादायी चिंतन.. शुक्रिया.

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...