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अक्तूबर 14, 2011

संतान


तुम्हारी संतान तुम्हारे माध्यम से उत्पन्न हुई है, परन्तु तुमसे नहीं | तुम उसे अपना प्यार तो दे सकते हो, किन्तु विचार नहीं क्योंकि ये अपने ही विचार रखते हैं | तुम उनके समान बनने कि कोशिश तो कर सकते हो परन्तु उन्हें अपने समान बनाने कि लालसा मत रखो |
                                                                   
                                                                                 -खलील जिब्रान

         

5 टिप्‍पणियां:

  1. बड़ों के विचार बड़ों के हिसाब से....!
    और हर बड़ा बच्चों पर अपने विचार थोपने में लगा रहता है !
    और उसे manners का नाम देता है...!!
    अच्छा हो की हम ही बच्चे बन जाये.....!!

    ***punam***

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  2. बहुत क्रन्तिकारी विचार हैं खलील जिब्रान के, हम अपनी संतान को अपना मानते हैं यह पहली भूल है.. उन पर अपने विचार थोपते हैं यह दूसरी भूल है, और तीसरी भूल कि हम उन्हें अपने जैसे बनाना चाहते हैं...जो संभव ही नहीं क्योंकि वे हमसे आगे हैं...भविष्य कभी भूत नहीं हो सकता...बेहतर है कि हम आगे बढ़ें न कि उन्हें पीछे ले जाने की कोशिश करें... सुंदर पोस्ट!

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  3. Imran bhai Khaleel zibran ji ke bare men mera ye khyal hai ki darshan aur samaj sastra jaise kai sastroon ki had inki dahleej par khatam ho jati hai.

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  4. बहुत सुन्दर विचार.. संतान को अपने स्वस्थ और स्वतंत्र विचार के साथ जीने की छूट तो मिलनी ही चाहिए.

    बकरीद कि मुबारकबाद!!

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...