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जनवरी 25, 2012

परदा


मैं मौत के बाद भी जीऊँगा,  और मैं तुम्हारे कानों में गाऊँगा,
मैं तुम्हारे आसन पर बैठूँगा हालाँकि बिना शरीर के

और मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे खेतों में जाऊँगा
एक अदृश्य आत्मा बनकर,
मैं तुम्हारे पास तुम्हारी आग के सहारे बैठूँगा 
एक अदृश्य अतिथि बनकर,

मौत तो कुछ भी नहीं बदलती, परदे के अलावा
जो की हमारे चेहरे पर पड़ा रहता है,

 - खलील जिब्रान 



22 टिप्‍पणियां:

  1. अगर इंसान अपनी मौत देख ले तो जीना आसान हो जाता है....

    कुछ इसी तरह का अनुभव भी हो जाता है....

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  2. बेनामीजनवरी 25, 2012

    बिकुल सही पूनम दी ......शुक्रिया|

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  3. सुंदर प्रस्तुति .. बधाई
    गणतंत्र दिवस कि हार्दिक सुभकामनाएँ.

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    1. बेनामीजनवरी 26, 2012

      शुक्रिया जी आपको भी शुभकामनायें|

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  4. बहुत गहन भाव ....सोच में पड़ गयी हूँ ...!!

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    1. बेनामीजनवरी 26, 2012

      सोच में पड़ जाने के लिए ही तो पोस्ट की है अनुपमा जी :-)

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    2. ये ख्याल एक बहलावा है ...दरअसल अपनों की मौत एक ऐसा खालीपन देती है जो जीवन में कभी नहीं भरता ....

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    3. बेनामीजनवरी 27, 2012

      सहमत हूँ आपसे......पर क्या मृत्यु ही अन्तत: सत्य नहीं है......संसार में सब चल रहा है हर ओर गति है....... खालीपन भी फिर भर जाता है यही क्रम चलता रहता है यही जिंदगी है |

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  5. bahut bahut hi umda, kitni gahri baat kitne sarl shbdon me likhi hai ,itni achchi rachna hm sab ke sath baantne ke liye shukriyaa....

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    1. बेनामीजनवरी 26, 2012

      आपका भी शुक्रिया यहाँ तक आने का और अपनी कीमती राय देने का|

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  6. मौत तो कुछ भी नहीं बदलती, परदे के अलावा
    जो की हमारे चेहरे पर पड़ा रहता है,
    वाह...कितनी सच्ची बात कह गए हैं खलील जिब्रान साहेब...शुक्रिया इमरान भाई उनकी बात हम तक पहुँचाने के लिए...

    नीरज

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    1. बेनामीजनवरी 26, 2012

      बहुत बहुत शुक्रिया नीरज जी आपका...........हम तो सिर्फ ज़रिया हैं |

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  7. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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    1. बेनामीजनवरी 26, 2012

      शुक्रिया सुषमा जी|

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  8. बहुत ही गहन भाव संयोजन ।

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    1. बेनामीजनवरी 27, 2012

      शुक्रिया सदा जी|

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  9. मृत्यु के बाद भी सदगुरु हमारे साथ रहता है.. अशरीरी होकर वह हमारी ज्यादा मदद कर पाता है, खलील जिब्रान जैसा संत ही ऐसी बात कह सकता है...आभार!

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    1. बेनामीजनवरी 27, 2012

      शुक्रिया अनीता जी.सहमत हूँ आपसे|

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  10. आपके इस उत्‍कृष्‍ठ लेखन के लिए आभार ।

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  11. बेनामीजनवरी 29, 2012

    शुक्रिया आपका |

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  12. वाह...बेजोड़ रचना...बधाई

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  13. आपकी रचना बहुत अच्छी लगी,लाजबाब सुंदर पंक्तियाँ,..

    MY NEW POST...मेरे छोटे से आँगन में...

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...