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जुलाई 23, 2012

रास्ता


मेरा घर मुझसे कहता है "मुझे मत छोड़ना क्योंकि तुम्हारा अतीत यहीं गुज़रा है"

और रास्ता कहता है " जाओ, मेरा अनुसरण करो क्योंकि मैं तुम्हारा भविष्य हूँ"

और मैं घर और रास्ते दोनों से कहता हूँ, " न कोई मेरा अतीत है, न कोई मेरा भविष्य है । अगर मैं यहाँ रूक भी जाऊँ तो मेरे रुकने में भी गति है और अगर मैं जाता हूँ तो मेरे चलने में भी स्थिरता है । केवल प्रेम और मृत्यु ही प्रसंग को बदल सकते हैं ।"

- खलील जिब्रान 

21 टिप्‍पणियां:

  1. केवल प्रेम और मृत्‍यु ही प्रसंग को बदल सकते हैं ...
    बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ...
    कल 25/07/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


    '' हमें आप पर गर्व है कैप्टेन लक्ष्मी सहगल ''

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  2. रुकने में गति और चलने में स्थिरता...दोनों एक साथ होते हैं प्रेम और मृत्यु में, क्योंकि वहाँ दोनों में कोई भेद ही नहीं रह जाता, क्योंकि प्रेम में भी मृत्यु की तरह प्रेमी रहता ही नहीं, केवल प्रेमास्पद ही रहता है... कौन चलेगा और कौन थमेगा...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया अनीता जी ।

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  3. रुकने में गति और चलने में स्थिरता ....कितनी गहनता... कितनी सजगता ...कितनी उन्मुक्तता ...और स्थिर सहज सत्यता .....पता नही कितनी बार पढ़ लिया ....बार बार पढ़ रही हूं...हर बार एक नया आयाम सामने आ रहा है .....बदलाव केवल प्रेम और मृत्यु से ...
    कुछ इसके आगे का वृत्तांत हो तो वो भी सांझा करो ...../
    बहुत दिन बाद आना ...लग रहा है बहुत कुछ मिस कर दिया ..../अब कोशिश यही ....ब्लॉग मिस नही हो ....या कहूँ सिर्फ ब्लोग्स ही .../:)

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया अंजू.....जिब्रान जैसे लेखकों की यही विशेषता है की वो नित नूतन हैं जब भी पढो तो नया ही लगेगा.....जो बात ब्लॉग में है वो अन्यथा कहीं नहीं उम्मीद है आगे भी आती रहोगी।

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  4. बहुत ही सुन्दर व गहरी पंक्तियाँ...

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  5. गहन संदेश ..बहुत सुन्दर..

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  6. मूल बात है प्रेम और इसी पर ज़ोर देने की ज़रूरत है क्योंकि मृत्यु हमारे वश में नहीं है। जो प्रेम में है,उसी के लिए भूत है,उसी के लिए भविष्य।

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  7. आप सभी लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया ।

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  8. गहन भाव ..सुन्दर पंक्तियाँ..

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...