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मार्च 05, 2013

उदारता


उदारता उस वस्तु के दान में नहीं, जिसकी तुम्हारी अपेक्षा दूसरे को अधिक आवशयकता है, बल्कि उस वस्तु के दान में है , जिसकी दूसरे की अपेक्षा तुम्हें स्वयं अधिक आवशयकता है ।

- खलील जिब्रान


6 टिप्‍पणियां:

  1. ...क्यों कि कुदरत का नियम है जो हम देंगे वही हमें मिलेगा...और पता है हमें सबसे अधिक किसकी आवश्यकता है .. प्रेम, आनंद, और शांति की...तो हम वही क्यों न लुटाएं..मुझे लगता है जिब्रान ऐसा ही कुछ कहना चाहते हैं..

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  2. बहुत ही उत्‍कृष्‍ट विचार ... प्रस्‍तुति के लिए आभार

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...