खलील जिब्रान विश्व के महान दार्शनिक,लेखक, चित्रकार और कवि हैं| उनकी रचनायें सारी दुनिया के लोगों के लिए एक अमूल्य धरोहर है|अंधविश्वासों और आडम्बरों के सख्त विरोधी खलील जिब्रान एक महान विचारक थे|इस ब्लॉग के ज़रिये मेरी एक छोटी सी कोशिश की मैं उनके अमूल्य विचारों को सरल भाषा में लोगों के सामने रख सकूँ ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उनको पढ़ और समझ सकें|
फ़रवरी 01, 2013
द्वितीय
"मेरा वह द्वितीय जन्म था, जबकि मेरी आत्मा तथा मेरी देह ने परस्पर प्रेम प्रारंभ किया और मिलकर एक हो गए ।"
बहुत सुंदर विचार..आत्मा और देह जीवन भर अजनबी ही बने रहते हैं..एक जन्म में नहीं जन्मों जन्मों तक..जिनके भीतर ऐसा प्रेम घटता है उन्हें ही तो द्विज कहते हैं..
प्रेम एक है
जवाब देंहटाएंgahan aur sundar ...
जवाब देंहटाएंबेहद गहन भाव ...
जवाब देंहटाएंबहुत गहन विचार ..
जवाब देंहटाएंgahan abhivaykti.......
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर विचार..आत्मा और देह जीवन भर अजनबी ही बने रहते हैं..एक जन्म में नहीं जन्मों जन्मों तक..जिनके भीतर ऐसा प्रेम घटता है उन्हें ही तो द्विज कहते हैं..
जवाब देंहटाएं