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सितंबर 07, 2010

काल



बीता हुआ कल तो आज कि स्मृति-मात्र है और आने वाला कल है आज का स्वप्न| वर्तमान से कह दो कि वह स्मृति-विभोर होकर अतीत का आलिंगन करे और प्रेमातुर होकर भविष्य का |
                                          - खलील जिब्रान 

अगस्त 31, 2010

बात-चीत

तुम तभी बात करते हो जब अपने विचारों के साथ शांति नहीं रख पाते| क्योंकि विचार खुले आकाश में उड़ने वाला पंछी है, जो शब्दों के पिंजरे में अपने पंख तो अवश्य खोलता है, किन्तु उड़ान नहीं भर सकता| एकाकीपन का मौन आँखों को नंगे यथार्थ का दर्शन कराता है, जिससे लोग कतराना चाहते हैं|


                                                - खलील जिब्रान