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अक्तूबर 05, 2010

कर्म


जीवन अंधकारमय है, यदि आकांक्षा न हो |
सारी अकांछायें अंधी हैं, यदि ज्ञान न हो | 
सारा ज्ञान व्यर्थ है, यदि कर्म न हो | 
सारा कर्म खोखला है, यदि प्रेम न हो |
प्रेम को सर्वस्य बना देना ही कर्म है |

                                        - खलील जिब्रान

4 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा है, सर्वस्व प्रेम हो जाये तो आकांक्षा भी प्रेम की होगी तब तो कर्म भी पूजा बन जायेंगे !

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  2. प्रेम ही सभी रिश्तो का आधार है और प्रेम से किया गया कर्म ही वस्तुतः सफल और फलदायी होता है और जीवन के मूल्यों में जीवन और जीवन में खुशिया भर देता है..आपकी कविता बहुत सुन्दर भावो के साथ.. शुभकामना

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  3. ke asardar kavita ...........jivan ke sachchaai ko prakat karti..........

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  4. प्रेम को सर्वस्य बना देना ही कर्म है |

    बहुत खूब ....!!

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...