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जून 14, 2011

बादल



यदि तुम एक बादल पर बैठ जाओ और नीचे देखो तो तुम पाओगे कि दो देशों को विभाजित करने वाली किसी सीमा का अस्तित्व ही नहीं है, और न ही एक खेत को दूसरे खेत से अलग करने का निर्देशक पत्थर ही है |

दयनीय तो यह है कि तुम बादल पर बैठ ही नहीं सकते |

                                                                      -खलील जिब्रान

मई 25, 2011

देवरूप



"यदि तुम अहंभाव, जाति और देश के बंधन से एक हाथ भी ऊपर उठ सको, तब तुम अपने को देवरूप में पाओगे|"
                                                             - खलील जिब्रान   


मई 03, 2011

तुम कौन हो


मैं सिर्फ एक ही बार निरुत्तर हुआ हूँ | वह भी तब, जब एक मानव ने मुझसे पूछा ' तुम कौन हो ?'
                                                                   - खलील जिब्रान

अप्रैल 18, 2011

गहराई


जब प्रभु ने मुझे एक पाषाण-खण्ड की तरह संसार की इस अदभुत झील में फेंका, तो मैंने असंख्य वृत्ताकार लहरों के द्वारा इसकी शांत सतह को विक्षुब्ध कर दिया | किन्तु ज्यों-ज्यों मैं गहराई में बैठता गया, मैं शांत होता गया |

                                                         - खलील जिब्रान


मार्च 28, 2011

विशाल परिधि


"अभी कल तक मैं यह समझता था की मेरी आत्मा जीवन की विशाल परिधि में स्पंदन रहित एक छोटा सा कांपता हुआ अंशमात्र है|

और आज मैंने जाना की विशाल परिधि मैं ही हूँ, और इन स्पंदनमय अंशों से युक्त यह समस्त जीवन मेरे ही अन्दर गतिशील है |"
                                                                    - खलील जिब्रान