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जुलाई 27, 2011

शिक्षा

अपने शिष्यों के मध्य चलता हुआ गुरु उन्हें अपनी बुद्धि नहीं दे सकता, वह सिर्फ अपनी आस्था और अपना प्रेम बाँट सकता है वह तुमसे अपनी बुद्धि के भवन में प्रवेश करने को नहीं कहेगा, वह तुम्हे तुम्हारे अपने ही मस्तिष्क कि दहलीज़ पर ले जाएगा|
                                                                                   
                                                                        - खलील जिब्रान

जुलाई 05, 2011

धर्म


क्या हमारे समस्त कर्म और हमारी समस्त धारणायें ही धर्म नहीं हैं |
कौन है ? जो जीवन के हर एक पल को अपने सामने बिछाकर कह सकता है, " इतना ईश्वर का हिस्सा और इतना मेरी आत्मा के हिस्से में है, और इतना मेरे शरीर के हिस्से में |
तुम्हारा दैनिक जीवन ही तुम्हारा मंदिर और धर्म है | जब भी इसमें प्रवेश करो अपना सब कुछ साथ लेकर जाओ |
                                                                     - खलील जिब्रान

जून 14, 2011

बादल



यदि तुम एक बादल पर बैठ जाओ और नीचे देखो तो तुम पाओगे कि दो देशों को विभाजित करने वाली किसी सीमा का अस्तित्व ही नहीं है, और न ही एक खेत को दूसरे खेत से अलग करने का निर्देशक पत्थर ही है |

दयनीय तो यह है कि तुम बादल पर बैठ ही नहीं सकते |

                                                                      -खलील जिब्रान

मई 25, 2011

देवरूप



"यदि तुम अहंभाव, जाति और देश के बंधन से एक हाथ भी ऊपर उठ सको, तब तुम अपने को देवरूप में पाओगे|"
                                                             - खलील जिब्रान   


मई 03, 2011

तुम कौन हो


मैं सिर्फ एक ही बार निरुत्तर हुआ हूँ | वह भी तब, जब एक मानव ने मुझसे पूछा ' तुम कौन हो ?'
                                                                   - खलील जिब्रान