खलील जिब्रान विश्व के महान दार्शनिक,लेखक, चित्रकार और कवि हैं| उनकी रचनायें सारी दुनिया के लोगों के लिए एक अमूल्य धरोहर है|अंधविश्वासों और आडम्बरों के सख्त विरोधी खलील जिब्रान एक महान विचारक थे|इस ब्लॉग के ज़रिये मेरी एक छोटी सी कोशिश की मैं उनके अमूल्य विचारों को सरल भाषा में लोगों के सामने रख सकूँ ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उनको पढ़ और समझ सकें|
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जनवरी 17, 2014
जनवरी 04, 2013
बाँसुरी
भारी है मेरी आत्मा अपने स्वयं के पके हुए फल से
कौन अब आएगा, खायेगा और तृप्त होगा?
मेरी आत्मा लबालब भरी है मेरी ही मदिरा से
कौन अब ढालेगा, पियेगा और ठंडा होगा?
काश मैं एक वृक्ष होता, बिना फूल और बिना फल का
क्योंकि अधिकता की पीड़ा उजड़ेपन से कहीं अधिक कड़वी है
और अमीर का दुःख, जिसे कोई ग्रहण नहीं करता
कहीं बड़ा है एक भिखारी की निर्धनता से, जिसे कोई नहीं देता
काश मैं एक कुआँ होता, सुखा और झुलसा हुआ
और मनुष्य मेरे अन्दर पत्थर फेंकते
क्योंकि यह अच्छा है व्यय हो जाना
अपितु जीवित जलकर उद्गम बनना
जबकि मनुष्य उसकी बगल से गुजरें और उसका पान न करें
काश मैं एक बाँसुरी होता, पैर के नीचे कुचली हुई
क्योंकि यह चाँदी के तार वाली एक वीणा होने से अच्छा है
ऐसे मकान में, जिसके मालिक की उँगलियाँ न हों
और जिसके बच्चे बहरे हों,
- खलील जिब्रान
जनवरी 25, 2012
परदा
मैं मौत के बाद भी जीऊँगा, और मैं तुम्हारे कानों में गाऊँगा,
मैं तुम्हारे आसन पर बैठूँगा हालाँकि बिना शरीर के
और मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे खेतों में जाऊँगा
एक अदृश्य आत्मा बनकर,
मैं तुम्हारे पास तुम्हारी आग के सहारे बैठूँगा
एक अदृश्य अतिथि बनकर,
मौत तो कुछ भी नहीं बदलती, परदे के अलावा
जो की हमारे चेहरे पर पड़ा रहता है,
- खलील जिब्रान
दिसंबर 20, 2011
ओ कुहरे मेरे भाई !
ओ कुहरे मेरे भाई !
सफ़ेद साँस अभी तक किसी आकार में नहीं ढली है
मैं तुम्हारे पास वापस आ गया हूँ,
एक सफ़ेद साँस और बेआवाज़ होकर
एक लफ्ज़ भी अभी तक नहीं बोला,
ओ कुहरे मेरे पंखों वाले भाई ! अब हम एक साथ है
और साथ ही रहेंगे, जीवन के अगले दिन तक
कौन सी सुबह तुम्हे ओस कि बूँद बनाकर
बगीचे में लिटाएगी और मुझे
बच्चा बनाकर एक औरत के सीने पर
और हम एक दूसरे को याद रखेंगे,
ओ कुहरे मेरे भाई ! मैं वापस आ गया हूँ
एक दिल अपनी गहराईओं में सुनता हुआ
जैसा कि तुम्हारा दिल एक धड़कती हुई आकांक्षा
और तुम्हारी उद्देश्यहीन आकांक्षा कि तरह
एक सोच जो अभी तक नहीं टिकी जैसे कि तुम्हारी,
ओ कुहरे मेरे भाई !
मेरे हाथ अभी भी उन चीजों को पकडे हुए हैं
जो कि तुमने मुझे बिखेरने के लिए दी थीं
और मेरे होंठ सिले हुए हैं उस गीत पर
जो कि तुमने मुझे गाने के लिए दिया था
पर मैं तुम्हारे लिए कोई फल नहीं लाया और न तुम्हारे
पास मैं कोई आवाज़ लेकर आया हूँ
क्योंकि मेरे हाथ अंधे और मेरे होंठ खामोश हैं,
ओ कुहरे मेरे भाई !
मैंने इस दुनिया से बहुत ज़्यादा प्यार किया
और दुनिया ने मुझे वैसा ही प्यार दिया
क्योंकि मेरी सारी मुस्कुराहटें दुनिया के होंठो पर थी
और उसके सारे आँसू मेरी आँखों में
फिर भी हमारे बीच एक ख़ामोशी कि खाई थी
जो कि दुनिया नहीं भरना चाहती थी
और जिसे मैं पार नहीं कर सकता था,
ओ कुहरे मेरे भाई ! मेरे अमर भाई कुहरे
मैंने पुराने गीत अपने बच्चों को सुनाये
उन्होंने सुने और उनके चेहरे पर आश्चर्य व्याप्त था
पर कल ही वो अचानक ये गीत भूल जायेंगे
मैं नहीं जनता था कि किसके
पास तक हवा गीत नहीं ले जाएगी
हालाँकि वो गीत मेरा अपना नहीं था
लेकिन वो मेरे दिल में समां गया
और मेरे होंठो पर कुछ देर तक खेलता रहा,
ओ कुहरे मेरे भाई !
हालाँकि ये सब गुज़र गया, मैं शांति में हूँ
मेरे लिए ये काफी था कि उनके
लिए गाया जाये जो जन्म ले चुके हैं
और अगर्चे कि यह गाना मेरा अपना नहीं है
लेकिन वह मेरे दिल कि सबसे गहरी ख्वाहिश है,
ओ कुहरे मेरे भाई ! मेरे भाई कुहरे
मैं तुम्हारे साथ अब एक हूँ
अब मैं खुद "मैं" नहीं रहा
दीवारें गिर चुकी,जंजीरे टूट चुकी
मैं तुम्हारे पास आने के लिए
ऊपर उठ रहा हूँ एक कुहरा बनकर
और हम साथ-साथ सागर के ऊपर तैरेंगे
जीवन के दूसरे दिन तक
जबकि सुबह तुम्हे ओस कि बूँद बनाकर
बगीचे में लिटाएगी और मुझे
बच्चा बनाकर एक औरत के सीने पर
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