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जनवरी 31, 2011

अपराध और दंड


जब तुम्हारी आत्मा पवन पर सवार होकर भ्रमण करने गयी होती है और जब तुम अकेले और असरंक्षित रह जाते हो, तभी तुम दूसरों के प्रति फलतः अपने ही प्रति अपराध करते हो|

कोई पवित्र और पुण्यात्मा भी उस उच्चतम से ऊँचा नहीं उठ सकता, जो तुममे हरेक में मौजूद है| उसी प्रकार कोई दुष्ट और दुर्बल उस निकृष्टतम से नीचे नहीं गिर सकता, जो तुममे मौजूद है| जैसे एक पत्ती भी सम्पूर्ण पेड़ की खामोश जानकारी के बिना पीली नहीं पड़ती, वैसे ही अपराधी तुम सबकी छिपी हुई इच्छा के बिना अपराध नहीं कर सकता|

तुम उसे क्या सज़ा दोगे, जो शरीर से तो ईमानदार है, लेकिन मन से चोर है?

और तुम उसे क्या दंड दोगे, जो देह की हत्या करता है, लेकिन जिस की खुद की आत्मा का हनन किया गया है?

और तुम उन्हें कैसे सज़ा दोगे, जिनका पश्च्याताप पहले ही उनके दुष्कृत्यों से अधिक है?
                                                                              
                                                                  - खलील जिब्रान

जनवरी 09, 2011

क्रय - विक्रय


धरती अपनी उपज तुम्हारे हवाले करती है| और अगर तुम अपनी अंजलि भरना ही जान लो, तो तुम्हे कोई आभाव नहीं रहेगा| पृथ्वी के उपहारों के लेन - देन में ही तुमको भरपूर प्राप्ति हो जाएगी और तुम्हे संतोष होगा|

लेकिन अगर यह लेन - देन प्रेम, उदार और न्यायपूर्ण न होगा तो वह कुछ लोगों को लोभ की ओर ले जायेगा और कुछ लोगों को भूखा रहने की ओर|
                                                                           - खलील जिब्रान   

दिसंबर 26, 2010

खान - पान


काश तुम पृथ्वी की सुवास पर निर्भर और अमरबेल की भाँति केवल किरणों पर जीवित रह सकते|

लेकिन क्योंकि पेट भरने के लिए तुम्हे हिंसा करना और प्यास बुझाने के लिए नवजात बछड़े से उसकी माँ का दूध लूटना ही पड़ता है तो वह कार्य प्रभु की पूजा के रूप में करो , अपने थाल को बलिवेदी समझो|

किसी जीव को हलाल करते समय उससे अपने मन में कहो-

" जो शक्ति तुम्हारा वध कर रही है, उसी ने मुझे भी मार रखा है और मुझे भी खाया जायेगा, क्योंकि जिस कानून ने तुम्हें मेरे हाथों में सौंपा है, वो मुझे और भी शक्तिशाली हाथों में सौपेंगा|"

                                                                        - खलील जिब्रान

दिसंबर 09, 2010

वस्त्र


तुम्हारे वस्त्र तुम्हारे बहुत से सुन्दर अंश को छिपा लेते हैं, लेकिन असुन्दर  को नहीं| हालाँकि तुम वस्त्रों में अपनी गुप्तता की आज़ादी खोजते हो, लेकिन तुमको प्राप्त होते हैं बंधन और बाधा|

काश धूप और वायु से तुम्हारा मिलन तुम्हारी त्वचा द्वारा अधिक होता और वस्त्रों द्वारा कम| क्योंकि जीवन के प्राण सूर्य के प्रकाश में हैं और जीवन के हाथ हवा के झोंकों में हैं|

भूलो मत की मलिन मन की आँखों के सम्मुख लज्जा ढाल के सामान है| और जब मलिन मन ही न होंगे, तब लज्जा केवल एक बेडी और विकृत करने वाली वस्तु के सिवा क्या होगी?

और भूलो मत की धरती तुम्हारी नंगी पग-तलियों का स्पर्श पाकर प्रसन्न होती है और पवन तुम्हारे केशों से अठखेलियाँ करना चाहता है|

नवंबर 21, 2010

घर



तुम्हारा घर जहाज़ का लंगर न बने, बल्कि मस्तूल बने| तुम दरवाज़े में से गुज़र सको, इसके लिए तुम अपने पंख समेटो मत और कहीं छत से टकरा न जाएँ इसलिए सिरों को झुकाओ मत, कहीं दीवारें दरककर गिर न पड़े, इसलिए साँस लेने से डरो मत|

तुम उन मकबरों में मत रहो जो मुर्दों ने जीवितों के लिए बनाये हैं| भले ही तुम्हारा घर भव्य और सुन्दर न हो, लेकिन तुम्हारा घर न तो तुम्हारे राज़ों को छुपाये और न तुम्हारी तृष्णाओं का आश्रय हो|

क्योंकि वह जो तुममे अनंत है, आकाश के महल में रहता है, जिसका फाटक प्रभात का कोहरा है और जिसकी खिड़कियाँ रात की रागनियाँ और खामोशियाँ है |
                                                                                       -खलील जिब्रान